जयपुर, 4 अप्रैल . एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने लॉरेंस गैंग के बड़े नामों में शामिल आदित्य जैन को दुबई से गिरफ्तार किया है. आरोपित आदित्य जैन उर्फ टोनी को टीम शुक्रवार सुबह दुबई से जयपुर लेकर पहुंची. आरोपित गैंग के लिए विदेश में बैठकर धमकी के कॉल अरेंज करता था. वह गैंग के कंट्रोल रूम के तौर पर काम कर रहा था. टोनी गिरोह द्वारा की गई जबरन वसूली, गोलीबारी सहित कई मामलों में वांटेड था. टोनी कुचामन सिटी का रहने वाला है. उसके पिता बिजनेसमैन हैं.
एडीजी क्राइम दिनेश एमएन ने बताया कि उनकी टीम आरोपित टोनी के पीछे कई समय से लगी हुई थी. राजस्थान में आने वाले थ्रेट कॉल की जब जांच की जाती थी तो हमेशा टोनी के बारे में जानकारी मिलती थी. इसलिए डीआईजी योगेश यादव, एएसपी नरोत्तम वर्मा ने इंटरपोल द्वारा उसके खिलाफ एक रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया था. इसके बाद एएसपी सिद्धांत शर्मा , सीआई मनीष शर्मा , सुनील जांगिड़ , रविंद्र प्रताप की एक टीम ने टोनी को यूएई में ढूंढ लिया. फिर सीबीआई के माध्यम से यूएई को इंटरपोल रेफरेंस भेजा गया. इस रेड कॉर्नर नोटिस और इंटरपोल रेफरेंस के आधार पर यूएई पुलिस अधिकारियों ने आदित्य जैन को हिरासत में लिया था.
आदित्य जैन के विरूद्ध राजस्थान के विभिन्न जिलों में अपहरण, बलात्कार, भयाक्रांत कर जबरन वसूली, अवैध हथियार रखने जैसे गंभीर अपराधों के साथ जेल में बंद अपराधियों को अपराध करने के लिए अवैध रूप से मोबाइल फोन व अन्य सामग्री उपलब्ध कराने एवं अपना नाम बदलकर छल करने से सम्बन्धित 7 प्रकरण दर्ज है.
चूरू जेल में गैंगस्टर वीरेंद्र चारण से मुलाकात
साल 2018 में आदित्य जैन उर्फ टोनी (26) को गर्लफ्रेंड से रेप व आर्म्स एक्ट के मामले में अरेस्ट कर जेल भेजा गया था. चूरू जेल में उसकी मुलाकात गैंगस्टर वीरेंद्र चारण से हुई थी. इसके बाद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की गैंग में जुड़ गया. जेल से छूटने के बाद गर्लफ्रेंड के साथ जनवरी-2024 में दुबई चला गया. दुबई में रहने के दौरान गर्लफ्रेंड से शादी करने पर परिजनों ने रिश्ता तोड़ लिया. दुबई में आदित्य उर्फ टोनी ने टैवल्स का बिजनेस शुरू किया. उसके करीब 3 महीने बाद अप्रैल-2024 से गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई गैंग के लिए डब्बा कॉलिंग का काम करने लगा. धमकी, फिरौती, हथियार व किसी भी व्यवस्था के लिए आदित्य उर्फ टोनी की ओर से डब्बा कॉलिंग करवाई जाने लगी. इससे पहले गैंग के लिए डब्बा कॉलिंग का काम अमरजीत बिश्नोई करता था.
दुबई पुलिस ने किया गिरफ्तार
राजस्थान में धमकी देने के लिए गैंगस्टर्स को कॉल के लिए आदित्य उर्फ टोनी के डब्बा कॉल अरेंज कराने के बारे में एजीटीएफ को पता चला था. आदित्य उर्फ टोनी के पासपोर्ट की जानकारी करने पर दुबई में होने का पता चला. इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस के साथ ही लुक आउट सर्कुलर भी जारी करवाया गया. 25 फरवरी को आर्मेनिया जाने के लिए आदित्य उर्फ टोनी दुबई एयरपोर्ट पहुंचा. दुबई पुलिस ने अरेस्ट कर लिया. दुबई पुलिस की ओर से गुरुवार रात आरोपित आदित्य उर्फ टोनी को एजीटीएफ को सौंपा गया.
गोलीबारी का विडियो वायरल करते थे सोशल मीडिया पर
28 वर्षीय आदित्य जैन पुत्र जाम्बू कुमार जैन निवासी रामादेवी शारया मार्ग, पुराना बस स्टैंड के पास डीडवाना-कुचामन राजस्थान का रहने वाला है. टोली विभिन्न शहरों के व्यापारियों को डरा धमकाकर व्हाट्सअप्प कॉल व वॉयस रिकॉर्डिंग के जरिए धमकी भरी फिरौती की मांग कर आम जनता को प्रताड़ित करने लग गया. आदित्य जैन लॉरेन्स विश्नोई या रोहित गोदारा गैंग को जिन व्यवसायों को अवैध वसूली का लक्ष्य बनाया जाना है उनके फोन नम्बर एवं परिवार सम्बन्धी विवरण उपलब्ध करवाने का मुख्य साधन बना हुआ था. आदित्य जैन लॉरेन्स विश्नोई गैंग के विभिन्न सक्रिय सदस्य को डब्बा कॉलिंग द्वारा उनसे सम्पर्क स्थापित करवाता था. गिरोह का सरगना लॉरेंस बिश्नोई आदित्य जैन को निर्देश देता है और उसके निर्देशानुसार वह धनी व्यापारियों को वीओआइपी कॉल के जरिए धमकी भरे जबरन वसूली के लिए कॉल करता है, जबरन वसूली के पैसे न देने पर वह अपने गिरोह के सदस्यों को भेजता है जो शार्प शूटर होते हैं और लक्षित परिवार पर गोलीबारी करते हैं और इस प्रक्रिया में हत्या करते हैं. वे जघन्य अपराध का लाइव वीडियो बनाते हैं. वीडियो को सोशल मीडिया वेबसाइट पर पोस्ट करते हैं और लॅरिस बिश्नोई ग्रुप के नाम पर खुलेआम हत्या की जिम्मेदारी लेते हैं. इस तरह के जघन्य अपराध और सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रदर्शन कर आरोपित आमजन में भय उत्पन्न करते थे. इससे गिरोह की नापाक आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है. गिरोह स्थानीय किशोर अपराधियों को सोशल मीडिया के जरिए फिरौती मांगने और गोलीबारी के लिए फुसलाता है और उन्हें बड़ी रकम देने का वादा करता है और उन्हें फर्जी नई पहचान पर किसी विदेशी देश में बसाने का वादा करता है. इस अपराध गिरोह के सदस्य कई अलग-अलग देशों में मौजूद हैं जो अलग-अलग भूमिका निभाते हैं और विभिन्न क्षमताओं में गिरोह की आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते है. आरोपी अपने साथियों को पुलिस से बचाने के लिए जगह उपलब्ध करवाना , अवैध उच्च श्रेणी के हथियार और गोला-बारूद और ड्रग्स की आपूर्ति करवाकर नए शार्प शूटरों की पहचान करना, उनका पालन-पोषण करना और उन्हें प्रशिक्षित करना, अवैध अपराध के पैसे को सफेद करना, नकली पहचान पत्र बनाना, स्थानीय किशोर अपराधियों को लुभाना काम करते था. गिरोह ने हाल ही में कई हाईप्रोफाइल अपराध किए है और व्हाट्सएप और वीपीएन का उपयोग करके कई जबरन वसूली कॉल की है.
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