देश की राजनीति में इस समय वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को लेकर जबरदस्त हंगामा मचा हुआ है। यह बिल संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है और अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून का रूप ले लेगा। लेकिन इसके पारित होते ही देश में राजनीतिक भूचाल आ गया है।
विपक्ष ने बताया मुस्लिम विरोधी कदमवक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और AIMIM समेत कई विपक्षी दलों ने खुलकर विरोध दर्ज किया है। इन दलों का आरोप है कि यह बिल अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों का हनन करता है और सरकार धार्मिक संस्थाओं के मामलों में हस्तक्षेप कर रही है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बिल को संविधान विरोधी बताते हुए इसका जोरदार विरोध किया है। कई विपक्षी नेताओं ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी है।
वायरल AI वीडियो ने मचाया सोशल मीडिया पर तहलकाइस पूरे विवाद के बीच एक एआई तकनीक से तैयार किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वक्फ बिल को जलाते हुए दिखाया गया है, जबकि राहुल गांधी, ओवैसी और अखिलेश यादव जैसे नेता आंसू बहाते नजर आ रहे हैं।
AI के प्रॉम्प्ट अब हृदय से लिखे जा रहे हैं: pic.twitter.com/vd6mYruBUl
— Ajeet Bharti (@ajeetbharti) April 4, 2025
हालांकि यह वीडियो एक व्यंग्यात्मक AI निर्माण है, लेकिन इससे सियासी माहौल और गर्म हो गया है। जहां सत्ताधारी पार्टी के समर्थक इस वीडियो को जोश के साथ साझा कर रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे संवेदनशील मुद्दों का मज़ाक उड़ाना बता रहा है।
विधेयक में क्या हैं मुख्य प्रावधान?वक्फ संशोधन विधेयक 2025 में कई अहम बदलाव प्रस्तावित हैं। सबसे प्रमुख बात यह है कि अब वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसलों के खिलाफ उच्च अदालतों में अपील की जा सकेगी। इससे पारदर्शिता और न्याय प्रक्रिया को मजबूत करने का दावा किया जा रहा है।
राज्यसभा में इस पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा:
“हमने विधेयक में अपील का अधिकार शामिल किया है ताकि अगर किसी को ट्रिब्यूनल से न्याय नहीं मिले तो वह अदालत का रुख कर सके। मैं चाहता हूं कि कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल इस विधेयक का समर्थन करें।”
सरकार का कहना है कि यह बिल किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है बल्कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक कदम है।
विपक्ष को अब भी ऐतराज़विपक्षी नेताओं का मानना है कि सरकार इस विधेयक के ज़रिए मुस्लिम समुदाय की धार्मिक संपत्तियों पर नियंत्रण पाना चाहती है। कांग्रेस नेताओं ने इस पर कहा कि बिना सभी पक्षों से बातचीत किए यह बिल जल्दबाज़ी में पास किया गया है। वहीं, ओवैसी ने इसे मुसलमानों के अधिकारों पर हमला बताया है।
आगे क्या होगा?अब जब कि यह विधेयक संसद से पास हो चुका है, इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर की प्रतीक्षा है। अगर राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है, तो यह विधेयक कानून बन जाएगा।
हालांकि विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट में दिया गया चैलेंज इस प्रक्रिया को धीमा या जटिल बना सकता है। फिलहाल, देश की राजनीति वक्फ बिल को लेकर पूरी तरह से दो हिस्सों में बंटी नज़र आ रही है – समर्थन और विरोध।
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