राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) गुरुवार शाम धौलपुर स्थित परशुराम धर्मशाला पहुंचीं, जहां कथावाचक मुरलीधर महाराज की राम कथा चल रही थी। राजे ने करीब दो घंटे तक कथा श्रवण किया और इसके बाद श्रोताओं को संबोधित भी किया। उनके भाषण में ऐसे संकेत मिले, जिनसे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया। उन्होंने अपने वक्तव्य में ‘वनवास’ और ‘धैर्य’ जैसे प्रसंगों का उल्लेख किया, जिसे कई विश्लेषक सीधे उनके मौजूदा राजनीतिक हालात से जोड़कर देखने लगे हैं।🚩🚩जय सियाराम 🚩🚩
— MurlidharJi Maharaj (@MurlidharJiM) August 29, 2025
पुज्य संत श्री मुरलीधर जी महाराज के श्रीमुख से भगवान परशुराम सेवा सदन, धौलपुर, राजस्थान में चल रही नव दिवसीय "श्रीराम कथा" (21 से 29 अगस्त) के अष्टम दिवस के अद्भुत दृश्य.......
पावन उपस्थिति :- @VasundharaBJP जी #MurlidharJiMaharaj pic.twitter.com/VVK8n0Ro3e
“जिसे अपना समझो, वही कभी पराया हो जाता है”
राजे ने अपने संबोधन में कहा – “आज की दुनिया बड़ी निराली है। कई बार जिसे हम अपना मानते हैं, वही पराया साबित हो जाता है। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियां हर किसी को निभानी पड़ती हैं। मां, बहू और बेटी – हर एक की अपनी भूमिका होती है।” उनकी यह टिप्पणी सीधे तौर पर उनके राजनीतिक परिवार यानी भारतीय जनता पार्टी से जोड़ी जा रही है। यह सर्वविदित है कि राजस्थान में बीजेपी सरकार बनने के बाद वसुंधरा राजे को वह जिम्मेदारी नहीं दी गई, जिसकी उम्मीद उनके समर्थक कर रहे थे।
“वनवास हर किसी के जीवन का हिस्सा”
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा – “वनवास केवल भगवान श्रीराम की कथा तक सीमित नहीं है। जीवन में किसी न किसी पड़ाव पर हर व्यक्ति को यह दौर देखना पड़ता है। लेकिन जिस तरह वह आता है, उसी तरह चला भी जाता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रभु राम ने सिखाया है कि कठिन समय में धैर्य सबसे बड़ा संबल होता है। राजे ने कहा – “दुनिया में कुछ भी स्थायी नहीं है। तराजू का पलड़ा कभी ऊपर उठता है, तो कभी नीचे गिरता है। इसलिए मन में कोई गांठ बांधकर बैठना व्यर्थ है।”
धौलपुर प्रवास के राजनीतिक मायने
हालांकि राजे का यह दौरा निजी बताया गया, लेकिन अचानक राम कथा में उनकी मौजूदगी और स्थानीय कार्यकर्ताओं से मुलाकात को सिर्फ सामान्य यात्रा मानना आसान नहीं है। राजनीतिक जानकार इसे एक संकेत मान रहे हैं कि वसुंधरा राजे अब भी राजस्थान की राजनीति में सक्रिय और प्रासंगिक बनी रहना चाहती हैं।
उनके हालिया बयान ने यह साफ कर दिया है कि वे अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। राजे मानती हैं कि मौजूदा ‘वनवास’ हमेशा के लिए नहीं है और जल्द ही उनका दौर भी बदलेगा। आने वाले समय में उनके ऐसे बयान और भी राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ा सकते हैं।
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